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अभद्र व्यवहार से इंसान अपना वजूद खो देता है

अभद्र व्यवहार से इंसान अपना वजूद खो देता है उसे समाज में हीन भावना का सामना करना पड़ता है अपनी खराब परिस्थितियों को से इंसान को हार नहीं मानना चाहिए निरंतर कर्म करने से भाग्य की रेखा में परिवर्तन हो जाता है

मैं गुलाब की तरह खिल गई

मैं गुलाब की तरह खिल गई मेरे पीछे सब लोग दीवाने हो गए जिसको अपना बनाने की कोशिश में करती रही वह बेगाने हो गए

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फुर्सत में तेरे इश्क का जाम पीना चाहता हूं

फुर्सत में तेरे इश्क का जाम पीना चाहता हूं जिंदगी को जी भर के जीना चाहता हूं अपना सहयोग देती रहना हमसफ़र बनकर नहीं तो तुम्हारे बिना यह जिंदगी अधूरी रह जाएगी

अभद्र व्यवहार से इंसान अपना वजूद खो देता है

अभद्र व्यवहार से इंसान अपना वजूद खो देता है उसे समाज में हीन भावना का सामना करना पड़ता है अपनी खराब परिस्थितियों को से इंसान को हार नहीं मानना चाहिए निरंतर कर्म करने से भाग्य की रेखा में परिवर्तन हो जाता है

मेरे मुकद्दर ने मुझको ऐसा सजा दिया

मेरे मुकद्दर ने मुझको ऐसा सजा दिया जो हो गया था हासिल मैंने लुटा दिया दर्द किसको सुनाऊं मैं अपने नसीब का मेरे चाहतों की महफिल बर्बाद हो गई